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मध्यकालीन भारत मे धार्मिक आंदोलन:Sufi Andolan

Sufi Andolan : मध्यकालीन भारत मे मुसलमानो मे सूफी संप्रदाय और हिन्दू संप्रदाय मे भक्ति मार्ग पर बल अथवा भक्ति आंदोलन की प्रगति की | आज पोस्ट मे हम सूफी संप्रदाय के बारे मे पढ़ेंगे ओर इसके दूसरे भाग मे भक्ति आंदोलन के बारे मे जानेंगे |

Sufi Andolan

Sufi Andolan

सूफी आंदोलन

  • सूफी आंदोलन इस्लाम के रहस्यवादी तथा समन्वयवादी दर्शन की अभिव्यक्ति है
  • सूफियो का मठ खानकाह कहलाता है ,संघ के वस्ल और उनकी कब्र को दरगाह कहते है
  • अबुल फज़ल की रचना अकबरनामा मे 14 सूफी सिलसिलों का वर्णन है ,जिसमे से 4 सिलसिले भारत मे काफी लोकप्रिए है

चिश्ती सिलसिला

  • चिश्ती सिलसिले के संपादक अबु अब्दाल चिश्ती थे ,लेकिन भारत मे इसका प्रचार प्रसार ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने किया, उनका मुख्य केंद्र अजमेर था |
  • इस सिलसिले के संत गरीबीपूर्ण जीवनयापन करते थे
  • चिश्ती संत खानकाहो ने संगीत को महत्व दिया,इनकी संगीत सभा समा कहलाती थी, यही से कव्वाली का विकास भी हुआ

चिश्ती संप्रदाय के प्रमुख संत

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती

मोहम्मद गोरी ने इनको सुल्तान – उल-हिन्द की उपाधि प्रदान की थी | इनकी मृत्यु 1236ई मे हुयी थी,जिसके बाद अजमेर मे दरगाह का निर्माण करवाया गया था | इनके दो प्रमुख शिष्य थे -शेख हमीदुद्दीन नागौरी और शेख कुतुबद्दीन बख्तियार काकी |

शेख हमीदुद्दीन नागौरी : इनका जन्म दिल्ली मे हुआ और उनका कार्यक्षेत्र नागौर था | मोइनूद्दीन चिश्ती ने नागौरी को सुल्तान-उल-तरिकिन(असहायो का बादशाह) की उपाधि प्रदान की |

बख्तियार काकी : ये इल्तुतमिश कालीन थे कुतुबद्दीन ऐबक ने इनकी याद मे कुतुबमीनार का निर्माण करवाया था |

बाबा फरीद(Sufi Andolan)

इनका पूरा नाम फरीदुद्दीन मंसूर-शंकर-ए-गज था,इनसे गुरुनानक बहुत प्रभावित थे, इसलिए आदि ग्रंथ मे बाबा फरीद की शिक्षाओ का संकलन है | इनका कार्यक्षेत्र पंजाब के अजोधन मे था, इन्होने चिल्लाह-ए-मा-अकुश की साधना की |

निजामुद्दीन औलिया

ये बाबा फरीद के शिष्य थे | इनका कार्यक्षेत्र ज्ञासपुर(दिल्ली)था | ये एकमात्र सूफी संत थे जिन्होने शादी नहीं की थी,इनको महबूब इलाही(ईश्वर का प्रिय)भी कहा जाता है इन्होने भारतीय योग प्राणायाम को अपनाया था, इसलिए इन्हे योगसिद्धि भी कहा जाता था | शेख चिश्ती, अमीर खुसरो एवं अमीर हसन दहलवी इनके प्रमुख शिष्य थे |

बहरुद्दीन गरीब

इन्होने दक्षिण भारत मे चिश्ती सिलसिले का प्रचार प्रसार किया | इनकी गतिविधियो का केंद्र दौलताबाद था |

गेसूदराज गरीब

इन्होने दक्षिण भारत मे गुलबर्गा को अपना केंद्र बनाया, इन्होने बंदा नवाज़ की उपाधि प्राप्त की |

शेख सलीम चिश्ती (Sufi Andolan)

ये अकबर के समकालीन थे | अकबर ने अपने पुत्र जहाँगीर का नाम सलीम रखा था |

सुहरावर्दी सिलसिला(sufi andolan)

  • सुहरावर्दी सिलसिले का प्रभाव उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत क्षेत्र मे था |
  • शिहाबुद्दीन उमर सुहरावर्दी इसके मुख्य प्रवर्तक थे,लेकिन भारत मे इस सिलसिले के प्रवर्तक का श्रेय संत शेख बहाउद्दीन जकारिया को ही माना जाता है
  • इस सिलसिले के संत शेख जलालुद्दीन के पद पर नियुक्त किया था |
  • सुहरावर्दी सिलसिले के संतो ने राजनीतिक संरक्षण प्राप्त किया था

कादिरीया सिलसिला

  • इस सिलसिले के संस्थापक अब्दुल कादिर जिलानी थे | उनकी मजार बगदाद मे है |
  • इस सिलसिले के संत सनानत पंथी इस्लाम के समर्थक थे तथा संगीत विरोधी थे | ये अपने सिर पर हरे रंग की पगड़ी बाँधते थे |
  • इस सिलसिले के प्रमुख संत मोहम्मद गौस ने उत्तर भारत मे इसका प्रचार प्रसार किया | गौस से प्रभावित होकर सिकंदर लोदी ने अपनी बेटी की शादी उनसे करदी |शेख मूसा,अकबर के समकालीन थे,दाराशिकोह,संत मुल्तान शाह बक्शी के शिष्य थे
  • फिरदौसी सिलसिला कदिरिया सिलसिले की एक शाखा थी,जो बिहार मे लोकप्रिय रहा |

नक्शबंदी सिलसिला

  • ख्वाजा उबैदुल्ला नक्शबंदी,इस सिलसिले के संस्थापक थे,लेकिन शेख अहमद फरुखी सरहिंदी ने भारत मे इसका प्रचार किया
  • ये कुरान,हदीस,शरियत के पालन पर ज़ोर देते थे और संगीत को इस्लाम विरोधी मानते थे
  • शेख अहमद सरहिन्दी को मुज्जदीद(इस्लाम)सुधारक कहा जाता था,वे अकबर व जहाँगीर कालीन थे | इन्होने अकबर के दीन-ए-इलाही का विरोध किया था,जहाँगीर ने इन्हे बंदी बनाया था

महत्वपूर्ण बिन्दु (Sufi Andolan)

  • शेख नसीरुद्दीन को चिराग-ए-दिल्ली के नाम से जाना जाता था |
  • सूफी मत मे गुरु को पीर व शिष्य को मुरीद कहा जाता था |
  • सत्तरी सिलसिला का संस्थापक अब्दुल सत्तार था,जो केवल मध्य भारत मे हे सक्रिय था |
  • औरंगजेब ने सरमद नामक सूफी संत को मृत्युदंड दिया था |
  • प्रत्येक सूफी सिलसिले का प्रधान खलीफा कहलता है

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