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Rajasthan General Knowledge : Rajasthan Art and Culture,Rajasthan Ke Lok Devta

Rajasthan General Knowledge : Rajasthan Art and Culture,Rajasthan Ke Lok Devta : हैलो दोस्तो, जैसा की आप जानते हमने rajasthan general knowledge की सिरीज़ शुरू कर रखी आज की पोस्ट भी उसी मे से है | आज की पोस्ट Rajasthan Art and Culture के संबन्धित है

राजस्थान मे होने वाली जितनी भी प्रतियोगी परीक्षा है उन सभी मे rajasthan art and culture जरूर पूछी जाती है | यदि आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे है तो ये पोस्ट आपके लिए महत्वपूर्ण है इस पोस्ट मे Rajasthan Ke Lok Devta के बारे मे विस्तार से बताया गया है इसलिए आप इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढे |

Rajasthan Ke Lok Devta

Rajasthan General Knowledge : Rajasthan Art and Culture,Rajasthan Ke Lok Devta

Rajasthan Ke Lok Devta

बाबा रामदेवजी

Baba Ramdev बाबा रामदेव  या रामदेवजी, या रामदेव पीर, रामशा पीर राजस्थान, भारत के एक हिंदू लोक देवता हैं। वह चौदहवीं शताब्दी का शासक था, जिसके पास चमत्कारी शक्तियां थीं, जिन्होंने अपना जीवन समाज के दलित और गरीब लोगों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया उन्हें भारत के कई सामाजिक समूहों द्वारा ईष्ट-देव के रूप में पूजा जाता है

उन्हें कृष्ण का अवतार माना जाता है इनके लोकगाथा गीत ब्यावले कहलाते हैं रामदेव जी का गीत सबसे लम्बा लोक गीत हैऔर बाबा रामदेव (Baba Ramdev) राजस्थान,गुजरात(Gujarat),उत्तर प्रदेश,(, Uttar Pradesh) मध्य प्रदेश( Madhya Pradesh),पाकिस्तान( Pakistan.) अनेक जगह पर पूजे जाने वाले लोक देवता है

और बाबा रामदेव (Baba Ramdev) का जन्म भाद्रशुक्ल द्वितीया (बाबेरी बीज) को उपडुकासमेर (Upadukasamer)गाँव, शिव तहसील (बाड़मेर) में 1352 ईस्वी में हुआ। 1385 ईस्वी भाद्र शुक्ल एकादशी को रामसरोवर (रुणेचा) में समाधि ली

परिवार:- पिता का नाम अजामिल जी, और माता का नाम मैणादे और उनकी पत्नी का नाम नेतल्दे (निहालदे) था रामदेव जी कि एक धर्म बहन भी थी जिसका नाम डाली बाई था,
प्रतीक चिन्ह तथा लोकगीत :- Ramdev ji रामदेव जी का प्रतीक चिन्ह “पगल्ये” कहलाते है
प्रमुख स्थल :- इनका प्रमुख मन्दिर रामदेवरा (रूणेचा), पोकरण तहसील (जैसलमेर) में है
मेला :- रामदेव जी का मेला भाद्र शुक्ल द्वितीया से भाद्र शुक्ल एकादशी तक रामदेवरा (रूणेचा) पोकरण तहसील (जैसलमेर) में है
उपनाम :- रुणिचा रा धणी, रामसापीर ,बाबा रामदेव

गोगाजी

Gogaji (गोगाजी चौहान) राजस्थान के लोक देवता हैं जिसकी पूजा भारत के उत्तरी राज्यों में विशेष रूप से राजस्थान, हिमाचल प्रदेश हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब क्षेत्र, उत्तर प्रदेश, जम्मू और गुजरात में की जाती हैगोगाजी गुरुगोरखनाथ (Gurugorakhnath) के परमशिष्य थे उनका जन्म विक्रम संवत 1003 में चुरू ( Churu) जिले के ददरेवा (Dadreva)गाँव में हुआ था

गोगाजी( Gogaji) देवता का मेला राजस्थान (Rajasthan) के हनुमानगढ़ (Hanumangarh )जिले का एक शहर गोगामेड़ी (Gogamedi,) के अन्दर भादों कृष्णपक्ष की नवमी को भरता है  कायम खानी मुस्लिम समाज गोगाजी( Gogaji)  को जाहर पीर के नाम से पुकारते हैं|

जन्म व जन्म स्थान :- गोगाजी जन्म चुरू की राजगढ़ (Rajgarh) तहसील (Churu) के ददरेवा (जेवरगाँव) Dadreva (Jevargaon) गाँव में हुआ। इनकी समाधि – गोगामेड़ी, नोहर तहसील (हनुमानगढ) में है
परिवार :- गोगाजी पिता का नाम जैवर सिंह, माता का नाम बाछल, पत्नी का केमल दे तथा गुरु का नाम गोरखनाथ था।
प्रतिक चिन्ह तथा लोकगीत :- गोगाजी चौहान का प्रतिक चिन्ह भाला लिए हुए अश्वारोही है इनके लोकगाथा गीतों में डेरू नामक वाद्य यंत्र बजाया जाता है।
उपनाम :- गोगा जी को सांपों के देवता तथा मुस्लिम जाहरपीर कहते है|

तेजाजी (Rajasthan Ke Lok Devta)

तेजाजी Tejaji एक राजस्थान के लोक देवता हैं उन्हें शिव के प्रमुख ग्यारह अवतारों में से एक माना जाता है और ग्रामीण राजस्थान में एक देवता के रूप में पूजा जाता है वीर तेजा का जन्म  माघ शुक्ला चतुर्दशी वि.स. 1130 को भारत के राजस्थान के खरनाल (नागौर) में हुआ था

वीर तेजा या तेजाजी को और राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात में देवता के रूप में पूजा जाता है | वीर तेजा या तेजाजी पिता का नाम तहड़ जी तथा माता का नाम रामकुंवर और पत्नी का नाम पैमल दे था तेजाजी का विवाह पेमल से हुआ था जो पनेर के प्रमुख झाँझर गोत्र के राय मल जाट की पुत्री थी तेजाजी का मेला परबतसर (नागौर) में ” भाद्र शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) ” को इनका मेला आयोजित होता है|

जन्म व जन्म स्थान :- वीर तेजा का जन्म  माघ शुक्ला चतुर्दशी वि.स. 1130 को भारत के राजस्थान के खरनाल (नागौर) में हुआ था
परिवार :- इनके पिता का नाम तहड़ जी तथा माता का नाम रामकुंवर  और पत्नी का नाम पेमल दे था |
प्रतिक चिन्ह तथा लोकगीत :- वीर तेजा जी का  प्रतीक चिन्ह हाथ में तलवार लिए अश्वारोही है।
मेला :-  तेजाजी का मेला परबतसर (नागौर) में ” भाद्र शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) ” को आयोजित होता है
उपनाम :- तेजाजी को कृषि कार्यो का उपकारक देवता, गायों का मुक्ति दाता, भी कहा जाता है |

पाबूजी

Pabuji पाबूजी राजस्थान के लोक-देवता (Rajasthan Ke Lok Devta ) हैं  Pabuji पाबूजी को  राजस्थान गुजरात और सिंधु के मैदान में भी पूजा जाता है वह गांव कोलू के दोदल (पाबूजी) और दो लड़कियों (सोना और पेमा) के चार बच्चों में से एक थे  Rajasthan राजस्थान के लोक देवता Pabuji पाबूजी राठौड़ का जन्म वि.संवत 1296 ई॰ में जोधपुर के पास कोलूमण्ड नामक गाँव में हुआ था।

पाबूजी के पिता का नाम धाँधल राठौड़ और माता का नाम कमला दे था पाबूजी कोल्हू के सुदूर रेगिस्तानी गाँव में रहते थे, और उस गाँव में उनके लिए एकमात्र प्रसिद्ध पारंपरिक मंदिर पाए जाते थे राजस्थान में भोपा समुदाय को पाबूजी का पुजारी माना जाता है। वे पाबूजी की कहानी को कैनवास पर चित्रित करते हैं|

जन्म व जन्म स्थान :- Rajasthan राजस्थान के लोक देवता Pabuji पाबूजी राठौड़ का जन्म वि.संवत 1296 ई॰ में जोधपुर के पास कोलूमण्ड नामक गाँव में हुआ था।
परिवार :-पाबूजी के पिता का नाम धाँधल राठौड़ और माता का नाम कमला दे था
प्रतिक चिन्ह तथा लोकगीत :- प्रतिक चिन्ह भाला व बायीं और झुकी हुई पगड़ी। इनके लोकगीत पवाडे़ कहलाते है।
मेला :- पाबूजी का मेला चैत्र अमावस्या को कोलू गाँव में भरता है।
उपनाम :-पाबूजी को ऊंटों के देवता, प्लेग रक्षक देवता, राइका/रेबारी जाति के आराध्य देव के नाम से भी जाना जाता है |

देवनारायण जी

देवनारायण जी (Devnarayan ji)  राजस्थान के लोक-देवता हैं इनको भगवान श्री विष्णु के अवतार कहा जाता हैं इनका वास्तविक नाम उदयसिंह ( Uday Singh)था। इनके पिताजी का नाम संवाई भोज एवं माता का नाम Sedu Khatani / Sadumata था इनकी पत्नी का नाम पीपलदे था

इनका जन्म मालासेरी डूंगरी, आशीन्द (भीलवाडा) में हुआ और  देवनारायण जी (Devnarayan ji)   गुर्जर जाति के आराध्य देव है |

जन्म व जन्म स्थान :- देवनारायण जी (Devnarayan ji) न इनका जन्म मालासेरी डूंगरी, आशीन्द (भीलवाडा) में हुआ
परिवार :– इनके पिताजी का नाम संवाई भोज एवं माता का नाम Sedu Khatani / Sadumata था इनकी पत्नी का नाम पीपलदे था
प्रतिक चिन्ह तथा लोकगीत :- देवनारायणजी की फड राज्य की सबसे लम्बी फड़ है। फड़ वाचन गुर्जर जाति के भोपों के द्वारा “जन्तर” वाद्य यंत्र  पर किया जाता है।
मेला :- देवनारायण जी का मेला भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को भरता हैं।
उपनाम :-गुर्जर जाति के आराध्य देव

हडबू/हरभू जी (Rajasthan Ke Lok Devta)

हड़बू जी मारवाड़ के पंच पीरों में से एक थे और  हड़बू जी के पिता का नाम – मेहाजी सांखला था और  हड़बू जी बाबा रामदेवजी के मौसेरे भाई थे हड़बू जी का जन्म नागौर के भूण्डोल/भूण्डेल गाँव में सांखला राजपूत परिवार में हुआ बैगटी में हड़बू जी प्रमुख पूजा स्थल है यहाँ हड़बू जी की गाड़ी (छकड़ा / ऊँट गाड़ी) की पूजा होती है इस गाड़ी में हड़बू जी विकलांग गायों के लिए दूर-दूर से घास भरकर लाते थे हड़बू जी सांखला राजपूतों के अराध्य देव है।

जन्म व जन्म स्थान :- हड़बू जी का जन्म नागौर के भूण्डोल/भूण्डेल गाँव में सांखला राजपूत परिवार में हुआ
परिवार :– हड़बू जी के पिता का नाम – मेहाजी सांखला था और  हड़बू जी बाबा रामदेवजी के मौसेरे भाई थे
प्रतिक चिन्ह तथा लोकगीत :- 
मेला :-
उपनाम :- हड़बू जी सांखला राजपूतों के अराध्य देव

मल्ली नाथ जी

Mallinath ji ‘रावल मल्लिनाथ’ राजस्थान के लोक संत हैं इनका जन्म तिलवाडा (बाडमेर) में हुआ और मारवाड़ के लोग उनको सिद्ध तथा अवतारी पुरुष मानते रहे हैं तथा इसका प्रमाण है, लूणी नदी के किनारे बसे बाडमेर जिले के तिलवाड़ा गाँव में बना हुआ इनका मंदिर, जहाँ प्रतिवर्ष चैत्र महीने में एक विशाल मेला लगता है। ‘रावल मल्लिनाथ’ के पिता का नाम रावल सलखा/ तिडा जी, माता का नाम जाणीदे था। गुरु का नाम उगम सी भाटी था उन्होंने सन् 1378 में मालवा के सूबेदार निजामुद्दीन को हरा कर अपनी वीरता का लोहा मनवाया था

जन्म व जन्म स्थान :- मल्लीनाथ जी का जन्म सन् 1358 में मारवाड़ के रावल सलखा तथा माता जाणीदे के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में हुआ था
परिवार :– ‘रावल मल्लिनाथ’ के पिता का नाम रावल सलखा/ तिडा जी, माता का नाम जाणीदे था। गुरु का नाम उगम सी भाटी था
प्रतिक चिन्ह तथा लोकगीत :-  No Data
उपनाम :- हड़बू जी सांखला राजपूतों के अराध्य देव

तल्लीनाथ जी

तल्लीनाथ जी (Tallinath Ji) जालौर जिले के अत्यंत प्रसिद्ध लोक देवता है इनका वास्तविक नाम गागदेव राठौड़  इनके गुरु जलन्धरनाथ थे। इन्होनें ही गागदेव को तल्लीनाथ का नाम दिया था इनके  पिता का नाम बीरमदेव था तल्लीनाथ जी शेरगढ़ (जोधपुर) ठिकाने के शासक थे खा जाता है की तल्लीनाथ बाबा प्रकृति प्रेमी थे इसलिए  इन्हें प्रकृति प्रेमी लोकदेवता भी कहते है ।Rajasthan Ke Lok Devta   

जालौर के पाँचोटा गांव के निकट पंचमुखी पहाडी के बीच घोड़े पर सवार बाबा तल्लीनाथ की मूर्ति स्थापित है |

कल्ला जी राठौड़ (Rajasthan Ke Lok Devta )

कल्ला जी राठौड़ राजस्थान के एक योद्धा थे जिन्हें लोकदेवता माना जाता है इनका  का जन्म मेड़ता राजपरिवार में आश्विन शुक्ल 8, विक्रम संवत 1601 को हुआ था इनके पिता मेड़ता के राव जयमल के छोटे भाई आसासिंह थे। भक्तिमती मीराबाई इनकी बुआ थीं और इनके गुरु प्रसिद्ध योगी भैरवनाथ थे Kallaji Rathore ने 1567 ई. में चित्तौडगढ़ के तृतीय साके के दौरान अकबर से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए कल्लाजी की कूल देवी का नाम नागणेची था और कल्लाजी अस्त्र-शस्त्र विद्या में भी निपुण थे डूंगरपुर जिले के सामलिया में कल्लाजी की काले पत्थर की मूर्ति हैं |

जन्म व जन्म स्थान :- ल्ला जी राठौड़ का जन्म मेड़ता राजपरिवार में आश्विन शुक्ल 8, विक्रम संवत 1601 को हुआ था
परिवार :– ‘इनके पिता मेड़ता के राव जयमल के छोटे भाई आसासिंह थे। भक्तिमती मीराबाई इनकी बुआ थीं और इनके गुरु प्रसिद्ध योगी भैरवनाथ थे
प्रतिक चिन्ह तथा लोकगीत :- 
मेला :-इनका मेला चेत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी तक लूणी नदी के किनारे तिलवाड़ा (बाड़मेर) नामक स्थान पर भरता हैं।
उपनाम :-केहर कल्याण, कमथण योगी, शेषनाग का अवतार, चार भुजाओं वाले देवता कहा जाता है।

वीर फता जी

  1. वीर फता जी का जन्म सांथू गांव (जालौर) में हुआ था
  2. सांथू गांव में प्रतिवर्ष भाद्रपद सुदी नवमी को मेला लगता है।

डूंगजी- जवाहर जी

  • डूंगजी- जवाहर जी शेखावटी क्षेत्र के लोकप्रिय देवता है
  • ठाकुर डूंगर सिंह व ठाकुर जवाहर सिंह शेखावत चचेरे भाई थे
  • और डूंगर सिंह पाटोदा के ठाकुर उदय सिंह व जवाहर सिंह बठोट के ठाकुर दलेल सिंह के पुत्र थे
  • और ये  शेखावाटी ब्रिगेड में रिसालदार थे

पंचवीर जी

  • पंचवीर जी शेखावटी क्षेत्र के लोकप्रिय देवता है।
  • शेखावत समाज के कुल देवता है अजीत गढ़ (सीकर) में मंदिर है।

झुंझार जी

इनका केंद्र इमलोहा गाँव (सीकर) है।

भूरिया बाबा (गौतम ऋषि महादेव )

  • भुरीया बाबा मीणा जनजाति के इष्टदेव है और मीणा लोग भूरिया बाबा (गौतमेश्वर) को अपना आराध्य मानते हैं
  • भुरीया बाबा मन्दिर राजस्थान के सिरोही जिले में पाली की सीमा पर है
  • यह सिरोही जिले के पोसालिया गाव में आता है
  •  पोसालिया गाव  अरावली की सुरम्मिय वादीयो में सुकडी नदी के किनारे पर स्थिती है
  • पोसालिया गाव इनका मेला 13 से 15 अप्रैल तक होता है
  • इस मेले में सभी जगह के मीणा समाज के लोग आते हैं

पंचवीर जी

  • पंचवीर जी शेखावटी क्षेत्र के लोकप्रिय देवता है।
  • शेखावत समाज के कुल देवता है अजीत गढ़ (सीकर) में मंदिर है।

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