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Indian General Knowledge 2021 PDF Free Download

Indian General Knowledge 2021 PDF

Indian General Knowledge 2021 PDF : हेलो दोस्तों आज हम हमारे भारत के महान अमर शहीद के बारे में आपको बता रहे हैं। जैसा की आप सभी जानते हैं कि गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस को हम सभी मनाते हैं लेकिन यह आज़ादी हमें उन शहीदों की वजह से मिली है जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इसलिए आज हम उन्ही शहीदों के बारे में आपको बता रहे हैं आज का Article प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है

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भारत के महान शहीद

नाम संबन्धित घटना सजा
खुदीराम बॉस 1908ई.मे सेशन जज किंग्सफोर्ड की गाड़ी पर बम फेकने के कारण बेणी रेल्वे स्टेशन पर गिरफ्तार हुये |11 अगस्त 1908 ई. को फांसी दे दी गयी |
अशफाकउल्ला खाँ19 अगस्त 1925ई.को कोकोरी डाकगाड़ी डकैती केस के अभियोग मे बंदी बनाया गया |18 दिसम्बर 1927ई.को फांसी दे दी गयी |
उधम सिंह 13 मार्च 1940ई.को सर माइकल – ओ – डायर को कैक्सटन हॉल,लंदन मे गोली मरने पर गिरफ्तार हुये |31 जुलाई 1940ई. को फांसी दे दी गयी |
भगत सिंह सोंडर्स की हत्या तथा 8 अप्रैल 1929 ई. को केन्द्रीय विधान सभा(जो आज लोकसभा है)मे बम फेकने के सिलसिले मे गिरफ्तार |सोंडर्स की हत्या के केस मे मौत की सजा हुयी तथा 23 मार्च 1931 को फांसी पर चढ़कर शहीद हो गये |
सुखदेवसोंडर्स की हत्या के केस मे मौत की सजा हुयी | 15 अप्रेल 1929 को गिरफ्तार हुये 23 मार्च 1931 को भगत सिंह के साथ फांसी दी गयी |
बटुकेश्वर दत्त भगत सिंह के साथ केंद्रीय असेंबली मे बम फेकने के आरोप मे गिरफ्तार हुये |इन्हे आजीवन कारावास का दंड मिला |
चन्द्रशेखर आज़ाद काकोरी डाकगाड़ी डकैती केस के मुख्य अभियुक्त व अँग्रेजी सरकार ने इन्हे जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए तीस हजार रूपय पुरस्कार की घोषणा की |27 फरवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क(इलाहाबाद) मे शहीद हुये |
मास्टर अमीचन्द दिल्ली षड्यंत्र के प्रमुख क्रांतिकारी अमीचन्द फरवरी 1914 मे वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की हत्या करने के आरोप मे बंदी बनाए गए |8 मई 1915 को चार साथियो केसाथ इन्हे फांसी दे दी गयी |
अवध बिहारी बॉस दिल्ली षड्यंत्र केस और लाहोर बम कांड के आरोप मे फरवरी 1914 को इन्हे बंदी बनाया गया |8 मई 1915 को फांसी दे दी गयी |
दामोदर चापेकर 22 जून 1897 प्लेग कमिश्नर रेंज और लेफ्टिनेंट एयर्स्ट की हत्या के सिलसिले मे अपने भाइयो के साथ गिरफ्तार कर लिया गया |
नोट: रैंड और एयर्स्ट की हत्या यूरोपियों की प्रथम राजनैतिक हत्या थी |
18 अप्रेल 1898 को फाँसी के तख्ते पर चढ़कर शहीद होगये | इनके भाई बालकृष्ण चापेकर को 12 मई 1899 तथा वासुदेव चापेकर को 8 मई 1899 को फाँसी पर लटका दिया |
मदन लाल ढींगरा 1 जुलाई 1909 मे कर्नल विलियम कर्जन वाइली( इंडिया ऑफिस मे राजनीतिक सहायक ) की हत्या करने के कारण गिरफ्तार हुये |16 अगस्त 1909 को फाँसी पर चढ़ा दिया गया |
राजगुरु 17 दिसम्बर 1928 को सोंडर्स की हत्या मे भाग लेने के कारण 30 दिसम्बर 1929 को पूना मे एक मोटर गेरेज मे गिरफ्तार हुये | 23 मार्च 1931 को केन्द्रीय जेल लाहौर मे भगत सिंह व सुखदेव के साथ फाँसी दे दी गयी |
वसुदेव बलवंत फडके एक सशस्त्र सेना बनाकर ब्रिटिश सरकार का विरोध करने के कारण 21 जुलाई 1879 को गिरफ्तार हुये |कालापानी की सजा के सिलसिले मे सदन मे आमरण अनशन करके 17 फरवरी 1883 को प्राण त्याग दिये |
करतार सिंह सराबागदर पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता तथा लाहौर सैनिक षड्यंत्र के नेता की हैसियत से गिरफ्तार किए गए |16 नवम्बर 1915 को फाँसी के तख्ते पर शहीद होगये |
राजेंद्र लाहीडीदक्षिणश्वर बम कांड तथा काकोरी डाक गाड़ी डकैती कांड के कारण गिरफ्तार हुये |17 दिसम्बर 1927 गोण्डा की जेल मे इन्हे फाँसी दे डी गयी |
अनंत कांहरेनासिक के जैक्सन हत्या कांड के प्रमुख अभियुक्त होने के कारण बंदी बनाए गए |19 अप्रेल 1910 को इन्हे फाँसी दे डी गयी |
सुभाष चन्द्र बॉस 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापूर मे आज़ाद भारत के अस्थायी सरकार की स्थापना की घोषणा की तथा जापानी सेना की सहायता से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर अधिकार करते हुये,1944 मे भारतीय सीमा के इम्फाल क्षेत्र मे प्रवेश किया |18 अगस्त 1945 को वायुयान दुर्घटना मे इनकी मौत हो गयी | परंतु इस दुर्घटना को अभी तक प्रमाणित नहीं माना गया है |
विष्णु गणेश पिंगल 23 मार्च 1915 को विस्फोटक बमो के साथ गिरफ्तार कर लिए गए |17 नवम्बर 1915 को इन्हे फाँसी दे डी गयी |
बृजकिशोर चक्रवतीमिदनापुर के जिला मजिस्ट्रेट बर्ज पर गोली चलाने के आरोप मे 2 सितम्बर 1933 को गिरफ्तार कर लिया गया 26 अक्टूबर 1934 को फाँसी पर लटका दिया गया |
कुसाल कोंवर9 अक्टूबर 1942 को ब्रिटिश सैनिक गाड़ी को पटरी से उतारने के संदेह मे गिरफ्तार हुये |16 जून 1943 को इन्हे फाँसी दे दी गयी |
असित भट्टाचार्य 13 मार्च 1933 को हबीब गंज मे हुयी डकैती तथा हत्या के अन्य मामले के सिलसिले मे गिरफ्तार किए गए |2 जुलाई 1934 को सिल्हट जेल मे इन्हे फाँसी दे दी गयी |
लाला लाजपत राय 17 नवम्बर 1928 के साइमन कमीशन का विरोध करने पर पुलिस के द्वारा पाश्विक लाठी प्रहारो के शिकार हुये |लाठी प्रहार के एक महीने के बाद इनका देहांत होगया |

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